Shiksha Ka Kshetra : शिक्षा का क्षेत्र

Shiksha Ka Kshetra

Shiksha Ka Kshetra : शिक्षा का क्षेत्र (Scope of Education) : विद्यादूत (vidyadoot) के इस लेख में हम शिक्षा के क्षेत्र (Shiksha Ke Kshetra) पर चर्चा करेंगें | शिक्षा का क्षेत्र (Shiksha Ka Kshetra/Shiksha Ke Kshetra) को समझने से पहले हम जानेंगे कि शिक्षा क्या है ? (Shiksha Kya Hai ?) शिक्षा एक जीवनपर्यन्त चलने वाली बालक के प्राकृतिक विकास की प्रक्रिया है, जिसे सीमाओं में नही बांधा जा सकता है | यह देश, काल स्थान आदि के बन्धनों से मुक्त होती है | वास्तव में शिक्षा एक अनियंत्रित वातावरण है, जिसमे रहते हुए बालक स्वतन्त्रतापूर्वक अपनी प्रकृति के अनुसार विभिन्न अनुभवों को प्राप्त करते हुए सीखता है | वर्तमान समय में शिक्षा में नित-नूतन होने वाले अनुसन्धानों ने शिक्षा का क्षेत्र (Shiksha Ka Kshetra) व्यापक कर दिया है |

शिक्षा का स्वरुप, उद्देश्य व लक्ष्य अतिव्यापक है इसलिए इसका क्षेत्र भी अत्यधिक विस्तृत है | शिक्षा के क्षेत्र को सामान्यता निम्नलिखित भागों में बाँटा जाता है |

  1. शिक्षा दर्शन (Philosophy of Education)
  2. शैक्षिक समाजशास्त्र (Educational Sociology)
  3. शिक्षा मनोविज्ञान (Educational Psychology)
  4. शिक्षा का इतिहास (History of Education)
  5. तुलनात्मक शिक्षा (Comperative Education)
  6. शैक्षिक प्रशासन व संगठन (Educational Administration and Organization)
  7. शैक्षिक समस्याएं (Educational Problems)
  8. शिक्षण विधियाँ (Teaching Methods)

शिक्षा से सम्बन्धित निम्नलिखित लेखों को भी देखें –

शिक्षा दर्शन (Philosophy of Education)

शिक्षा दर्शन, दर्शन का वह भाग जिसमे शिक्षा की समस्याओं का गहन अध्ययन किया जाता है और उन समस्याओं का सम्भावित समाधान प्रस्तुत किया जाता है | हेन्डरसन में अनुसार “शिक्षा दर्शन, शिक्षा की समस्याओं के अध्ययन में दर्शन का प्रयोग है |”

शिक्षा दर्शन में शिक्षा सम्बन्धी समस्याओं के दार्शनिक हल प्रस्तुत किये जाते है | इसके अंतर्गत विभिन्न दर्शनों और उनके द्वारा निश्चित शिक्षा के स्वरुप, उद्देश्य, पाठ्यचर्या और शिक्षण-विधियों का अध्ययन किया जाता है |

यह किसी भी शैक्षिक समस्या पर विभिन्न दार्शनिक विचारों के आधार पर चिन्तन करता है और उन सभी के आधार भिन्न-भिन्न समाधान प्रस्तुत करता है |

लेकिन ध्यान रहे कि यह किसी भी शिक्षा सम्बन्धी समस्या के सम्भावित समाधान (Tentative Solution) प्रस्तुत करता है, न कि निश्चयात्मक समाधान (Perfect Solution) देता है |

शैक्षिक समाजशास्त्र (Educational Sociology)

शैक्षिक समाजशास्त्र के जनक अमेरिका के विद्वान जॉर्ज पायन (E. George Payne) माने जाते है | जॉर्ज पायन के अनुसार “शैक्षिक समाजशास्त्र से हमारा तात्पर्य उस विज्ञान से है जो संस्थाओं, सामाजिक समूहों और सामाजिक प्रक्रीयाओं अर्थात् उन सामाजिक सम्बन्धो का जिनमे या जिनके द्वारा व्यक्ति अपने अनुभवों को प्राप्त और संगठित करता है, का वर्णन और व्याख्या करता है |”

शैक्षिक समाजशास्त्र में व्यक्ति, समाज, सामाजिक वर्गो, सामाजिक संस्थाओं, सामाजिक समूहों आदि का मानव के विकास पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जाता है और तदुपरान्त इस आधार पर शिक्षा का स्वरुप निश्चित किया जाता है साथ ही शिक्षा सम्बन्धी समस्याओं के समाजशास्त्रीय समाधान प्रस्तुत किये जाते है |

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शिक्षा मनोविज्ञान (Educational Psychology)

शिक्षा मनोविज्ञान का शाब्दिक अर्थ है – ‘शिक्षा सम्बन्धी मनोविज्ञान’ | यह मनोविज्ञान का व्यवहारिक रूप तथा शिक्षा की प्रक्रिया में मानव व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन है | यह मनोवैज्ञानिक सिद्धान्तों के द्वारा शैक्षिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है |

शिक्षा मनोविज्ञान के अंतर्गत बालकों के मानसिक, शारीरिक, सामाजिक व्यक्तित्व आदि के विकास तथा उनकी अभिरुचि, योग्यता, बुद्धि, क्षमता आदि का अध्ययन किया जाता है |

स्किनर लिखते है कि “शिक्षा मनोविज्ञान उन खोजो का शैक्षिक परिस्थितियों में प्रयोग करता है जोकि विशेष तथा मानव प्राणियों के अनुभव और व्यवहार से सम्बन्धित है |” क्रो और क्रो के अनुसार “शिक्षा मनोविज्ञान व्यक्ति के जन्म से वृद्धावस्था तक सीखने के अनुभवों का वर्णन और व्याख्या करता है |”

शिक्षा का इतिहास (History of Education)

इतिहास अतीत की घटनाओं का क्रमबद्ध और व्यवस्थित अध्ययन है | शिक्षा का इतिहास हमे अतीत की विभिन्न शैक्षिक-समस्याओं का अध्ययन करके वर्तमान की विभिन्न शैक्षिक-समस्याओं का समाधान करने में सहायता करता है |

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शिक्षा का इतिहास के अंतर्गत विभिन्न शिक्षाशास्त्रियों की शैक्षिक विचारधाराओं, अतीत की शिक्षा व्यवस्था, शिक्षा व संस्कृति में सम्बन्ध, शिक्षा के आरम्भ से लेकर वर्तमान तक इसका स्वरुप आदि का अध्ययन किया जाता है |

तुलनात्मक शिक्षा (Comperative Education)

तुलनात्मक शिक्षा के अंतर्गत हम विभिन्न देशों की शिक्षा-प्रणालियों का क्रमबद्ध रूप से विश्लेषणात्मक अध्ययन करके व उनकी शैक्षिक-समस्याओं का पता लगाकर अपने देश की शैक्षिक-समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास करते है |

अर्थात तुलनात्मक शिक्षा के अंतर्गत हम दूसरे देश की शैक्षिक-समस्याओं के आधार पर अपने देश की शैक्षिक-समस्याओं के समाधान का प्रयास करते है |

शैक्षिक प्रशासन व संगठन (Educational Administration and Organization)

इसमे शिक्षा के प्रशासन व संगठन से सम्बन्धित सिद्धान्तों और समस्याओं का अध्यनन किया जाता है | सरल शब्दों में, शैक्षिक प्रशासन व संगठन के अंतर्गत विद्यालय की स्थापना, प्रशासन, प्रबंधन, संगठन, नियन्त्रण, निर्देशन, परामर्श, प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, कर्मचारियों आदि की नियुक्ति, वेतन-भत्ते, उनकी क्रिया-कलाप, जिम्मेदारियों आदि का अध्ययन किया जाता है |

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शैक्षिक-अनुसंधान विश्वकोश के अनुसार “शिक्षा प्रशासन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा सम्बन्धित व्यक्तियों के प्रयास का समन्वय तथा उचित सामग्री का उपयोग, इस प्रकार किया जाता है जिससे मानवीय गुणों का समुचित विकास हो सके |

यह प्रक्रिया केवल बालकों व नवयुवकों के विकास से ही सम्बन्धित नही है बल्कि इसके अंतर्गत प्रोढ़ों व विद्यालय-कार्यकर्ताओं के विकास को भी महत्व प्रदान किया जाता है |”

शैक्षिक समस्याएं (Educational Problems)

शैक्षिक समस्याएं के अंतर्गत शिक्षा की विभिन्न समस्याओं का अध्ययन करके उनके समाधान प्रस्तुत किये जाते है | वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरुप व क्षेत्र अतिव्यापक हो गया है, जिसके परिणामस्वरुप इसकी समस्याओं में भी वृद्धि हुई है |

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अतः शिक्षा द्वारा ही शिक्षा में उत्पन्न विभिन्न समस्याओं का अध्ययन व विश्लेषण करके उनके समाधान के लिए उपाए प्रस्तुत किये जाते है |

शिक्षण विधियाँ (Teaching Methods)

इसमे विभिन्न विषयों की शिक्षण-विधियों व उनसे सम्बन्धित शिक्षण-सिद्धान्तों का अध्ययन किया जाता है, उनकी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाता है और नवीन शिक्षण-विधियों को खोजने का प्रयास किया जाता है | सही शिक्षण विधि शिक्षण को सफल बनाने में सहायता प्रदान करती है |

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