Shiksha Ke Uddeshya : शिक्षा के उद्देश्य क्या हैं

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Shiksha Ke Uddeshya : शिक्षा के उद्देश्य : Aims of Education in Hindi : विद्यादूत (vidyadoot) में शिक्षा के उद्देश्य (Shiksha Ke Uddeshya) के पहले शिक्षा के अर्थ (Shiksha ka arth), शिक्षा की परिभाषाएं (Shiksha Ki Paribhashayen), शिक्षा के प्रकार (Shiksha Ke Prakar), शिक्षा का संकुचित और व्यापक अर्थ (Shiksha ka sankuchit aur vyapak arth), औपचारिक और अनौचारिक शिक्षा में अंतर (Aupcharik Shiksha aur Anaupcharik Shiksha me antar) पर लेख प्रस्तुत किये जा चुके है | शिक्षा एक सामाजिक प्रक्रिया है, जो मानव विकास की प्रक्रिया के रूप में जीवनपर्यन्त चलती रहती है | शिक्षा के द्वारा ही एक मानव सभ्य और सुसंस्कृत नागरिक बनता है | जॉन डीवी ने शिक्षा के महत्व (Shiksha ka mahatva) को स्पष्ट करते हुए लिखा है कि जिस तरह शारीरिक विकास के लिए भोजन का महत्व है, उसी तरह सामाजिक विकास के लिए शिक्षा का महत्व है | संकुचित अर्थ में शिक्षा एक निश्चित समय में, नियोजित ढंग से विद्यालय में प्रदान की जाने वाली शिक्षा है जबकि व्यापक अर्थ में शिक्षा आजीवन चलने वाली वह प्रक्रिया है जो मानव के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करती है |

शिक्षा के उद्देश्य (Shiksha Ke Uddeshya) को समझने से पहले हम उद्देश्य का अर्थ समझेंगें | उद्देश्य शब्द संस्कृत की उत्+दिश्+य् धातुओं के मिलने से बना है | यहाँ उत् का अर्थ है ‘ऊपर की ओर’ तथा दिश् का अर्थ है ‘दिशा का अवलोकन करना’ |

इस प्रकार उद्देश्य शब्द का शाब्दिक अर्थ हुआ ‘उच्च या श्रेष्ठ दिशा का अवलोकन करना’ | उद्देश्य का सम्बन्ध मार्गदर्शन से है | उद्देश्य की पूर्ति व्यापक, विचारशील व दीर्घकालीन प्रक्रिया है |

शिक्षा के भी अपने उद्देश्य है, क्योकि निरुद्देश्य शिक्षा स्वयं में अर्थहीन होती है | उद्देश्य रहित शिक्षा शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों को ही लक्ष्यविहीन बनाती है |

शिक्षा के उद्देश्यों के निर्धारण की आवश्यकता : Shiksha Ke Uddeshy

शिक्षा का उद्देश्य (shiksha ka uddeshya) होना अतिआवश्यक है | बिना शिक्षा के उद्देश्यों पर विचार किये हुए शिक्षा की प्रक्रिया का संचालन सुचारू रूप से नही हो सकता है | उद्देश्य की पूर्ति तत्कालीन न होकर दीर्घकालीन प्रक्रिया है |

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उद्देश्य का कार्य मार्गदर्शन है | शिक्षा सीखने-सिखाने की एक उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है | उपयुक्त व पूर्व-निर्धारित उद्देश्यों के अभाव में किसी भी प्रकार की लाभदायक शिक्षा की कल्पना भी नही की जा सकती है |

शिक्षा का कोई एक सर्वमान्य उद्देश्य नही है | प्रोफेसर होर्न (Horne) लिखते है कि “शिक्षा का कोई एक अंतिम उद्देश्य नही होता है और न ही होना चाहिए | वेस्ले और रान्सकी के अनुसार उद्देश्यों में निम्नलिखित चार गुणों का समावेश होना आवश्यक है –

  1. उद्देश्य समाज के द्वारा मान्य होने चाहिए |
  2. उद्देश्य विद्यार्थियों द्वारा स्वीकार्य हो |
  3. उद्देश्य सम्भव समस्या को प्रस्तुत करते हों |
  4. उद्देश्यों की शिक्षण के द्वारा प्राप्ति की संभावना होनी चाहिए |

चूँकि शिक्षा बहुआयामी है इसलिए इसका कोई एक निश्चित उद्देश्य हो ही नही सकता | शिक्षा एक बहुउद्देश्यीय प्रक्रिया है |

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शिक्षा के निश्चित उद्देश्यों की आवश्यकता निम्नलिखित तथ्यों स्पष्ट होती है –

  • शिक्षा प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए शिक्षा के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करना आवश्यक है |
  • शिक्षा के उद्देश्यों को निर्धारित करके ही शिक्षा प्राप्ति के लिए किये जा रहे प्रयत्नों का मार्गदर्शन संभव होता है |
  • शिक्षा के उद्देश्यों के निर्धारण के बाद ही औपचारिक शिक्षा का मार्ग खुलता है |
  • शिक्षा के उद्देश्यों का निर्धारण करके ही शिक्षा की प्रक्रिया व विद्यालय संगठन को व्यवस्थित किया जा सकता है |
  • शिक्षा के उद्देश्यों का निर्धारण हो जाने पर ही उनकी प्राप्ति के लिए शिक्षा की पाठ्यचर्या व शिक्षण विधियों का निर्माण किया जा सकता है |

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Shiksha Ke Uddeshya : शिक्षा के उद्देश्य : Aims of Education in Hindi

शिक्षा का कोई एक निश्चित उद्देश्य (shiksha ka uddeshy) नही होता है | देश, काल, परिस्थिति और आदर्शानुसार शिक्षा के उद्देश्य विभिन्न है | शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य (Aims of Education in Hindi) निम्नलिखित है –

  1. शारीरिक विकास का उद्देश्य : Physical Development Aim
  2. मानसिक विकास का उद्देश्य : Mental Development Aim
  3. चारित्रिक व नैतिक विकास का उद्देश्य : Character and Morality Development Aim
  4. व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का उद्देश्य : Allround Development of Personality Aim
  5. सामाजिक विकास का उद्देश्य : Social Development Aim
  6. सांस्कृतिक विकास का उद्देश्य : cultural Development Aim
  7. आध्यात्मिक विकास का उद्देश्य : Spiritual Development Aim
  8. ज्ञानार्जन का उद्देश्य : Knowledge Aim
  9. वातावरण के साथ अनुकूलन का उद्देश्य : Adaptation of Situation Aim
  10. नेतृत्व शक्ति के विकास का उद्देश्य : Development of Leadership Aim
  11. राष्ट्रीयता की भावना के विकास का उद्देश्य : Development of Nationalism Aim
  12. अंतर्राष्ट्रीयता की भावना के विकास का उद्देश्य : Development of Internationalism Aim
  13. जीविकोपार्जन का उद्देश्य : Vocational Aim
  14. अवकाश-काल के सदुपयोग का उद्देश्य : Utilization of Leisure-Time Aim
  15. जीवन को सम्पूर्णता प्रदान करने का उद्देश्य : Complete Living Aim

Shiksha Ke Uddeshya : शिक्षा के उद्देश्य : Aims of Education in Hindi

अब हम शिक्षा के उद्देश्यों (Shiksha Ke Uddeshya, Aims of Education in Hindi) पर विस्तार से चर्चा करेंगें |

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1. शारीरिक विकास का उद्देश्य : Physical Development Aim

शिक्षा का एक प्रमुख उद्देश्य बालक का शारीरिक विकास करना भी है | अरस्तू ने कहा है “स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का सृजन ही शिक्षा है |” [Education is the creation of a sound mind in a sound body.” – Aristotle]

जब बालक का शरीर स्वस्थ होगा तब ही वह अपने सम्पूर्ण लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा | शारीरिक विकास पर ही मानसिक विकास निर्भर करता है | शारीरिक कमियां शिक्षा में बाधक होती है |

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2. मानसिक विकास का उद्देश्य : Mental Development Aim

शिक्षा का एक प्रमुख उद्देश्य बालक का मानसिक विकास करना भी है | बिना मानसिक विकास के शारीरिक विकास भी सम्भव नही है | बालक अपने लक्ष्य को तभी प्राप्त कर सकता है जब वह मानसिक व शारीरिक रूप से पूर्ण स्वस्थ हो |

मानसिक विकास में स्मरणशक्ति, विचारशक्ति, कल्पनाशक्ति आदि सभी मानसिक शक्तियाँ आती है | वर्तमान में भारत में योग शिक्षा द्वारा बालक के मानसिक व शारीरिक विकास का अत्यधिक प्रयास किया जा रहा है |

3. चारित्रिक व नैतिक विकास का उद्देश्य : Character and Morality Development Aim

शिक्षा का उद्देश्य चारित्रिक व नैतिक विकास करना भी है | प्राचीन काल में यह शिक्षा का सबसे प्रमुख उद्देश्य माना जाता था | आदर्शवादी शिक्षा इन पर अत्यधिक बल देती है | चरित्र व नैतिकता से ही अच्छे-बुरे का भेद किया जाता है |

व्यक्ति का चरित्र व नैतिकता उसके सम्पूर्ण जीवन पर प्रभाव डालती है | हरबर्ट ने कहा है कि “शिक्षा के समस्त कार्य केवल एक शब्द नैतिकता में प्रकट किये जा सकते है |” |”[The one and whole work of education may be summed up in the concept morality – Herbart] | चरित्र व नैतिकता मानव के सम्पूर्ण जीवन पर प्रभाव डालते है |

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शिक्षा द्वारा ही मानव में चारित्रिक व नैतिक विकास किया जा सकता है | गाँधी जी लिखते है कि “यदि शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है तो उसका प्रमुख कार्य नैतिक शिक्षा प्रदान करना है |”[“Moral education is the prime most function of education to provide, if it is to be worthy of its name.” – Mahatma Gandhi]

कुछ विद्वान चरित्र को शिक्षा से भी महत्वपूर्ण मानते है | स्पेन्सर महोदय लिखते है कि “मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता व रक्षाकवच चरित्र है, शिक्षा नही | [“No education but character is man’s greatest need and man’s safeguard.” – Spencer]    

4. व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का उद्देश्य : Allround Development of Personality Aim

शिक्षा मानव के व्यक्तित्व के किसी एक पक्ष का विकास नही बल्कि व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करती है | शिक्षा व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का सबसे प्रमुख माध्यम है |

शिक्षा व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करके बालक को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र व परिस्थिति के लिए सक्षम बनाती है | 

5. सामाजिक विकास का उद्देश्य : Social Development Aim : Shiksha Ke Samajik Uddeshya

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी होता है | समाज में रहकर ही उसका सम्पूर्ण विकास होता है | रेमन्ट के अनुसार, “समाज-विहीन मनुष्य कोरी कल्पना है |”[“the isolated individual is a figment of the imagination” – Raymont] | शिक्षा का एक अन्य उद्देश्य बालक का सामाजिक विकास करना भी है |

शिक्षा बालक में समाज के दायरे में रहकर सामाजिक व्यवहार करने की योग्यता का विकास करती है | शिक्षा ही बालक का समाजीकरण करती है |

जॉन डीवी लिखते है कि “जिस तरह शारीरिक विकास के लिए भोजन का महत्व है, उसी तरह सामाजिक विकास के लिए शिक्षा का |”[“What food for physical development, education is for social growth.” – John Dewey] 

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6. सांस्कृतिक विकास का उद्देश्य : Cultural Development Aim

संस्कृति शब्द का अर्थ है – ‘सम+कृति’ अर्थात् अच्छी प्रकार से सोच समझकर किये गये कार्य | ओटावे के अनुसार “किसी समाज की संस्कृति से अर्थ उस समाज की सम्पूर्ण जीवन पद्यति से होता है |” (The culture of a society means the total way of life of the society. – Ottaway)

शिक्षा संस्कृति का विकास करती है क्योकि शिक्षा के माध्यम से ही समाज अपनी संस्कृति को सुरक्षित रखता है, उसे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संक्रमित करता है और उसमे परिवर्तन और विकास करता है | इस प्रकार शिक्षा का एक उद्देश्य सांस्कृतिक विकास भी है |   

7. आध्यात्मिक विकास का उद्देश्य : Spiritual Development Aim

शिक्षा का एक अन्य उद्देश्य व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास करना भी है | आदर्शवादी शिक्षा व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास के उद्देश्य को सर्वोच्च स्थान देती है | प्राचीन काल में यह शिक्षा का सर्वोत्तम उद्देश्य माना जाता था |

गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी, नानक, ईसा मसीह, मुहम्मद साहब आदि सभी ने अध्यात्मिकता को शिक्षा का एकमात्र व अंतिम उद्देश्य माना है | आध्यात्मिकता व्यक्ति में नैतिक व चारित्रिक गुणों का विकास करता है |

यह व्यक्ति में प्रेम, परोपकार, सहानुभूति, दया, सहनशीलता, सहयोग, मानव व पशु सेवा आदि की भावना का विकास करता है | 

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8. ज्ञानार्जन का उद्देश्य : Knowledge Aim

प्राचीन काल में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञानार्जन करना अर्थात् ‘ज्ञान के लिए ज्ञान प्राप्त करना’ था | अर्थात् ज्ञान प्राप्त करना और प्राप्त ज्ञान को दूसरों को प्रदान करना |

मात्र ज्ञान प्राप्त करने से ही शिक्षा के सभी उद्देश्यों की पूर्ति हो जाती है क्योकि ज्ञान प्राप्ति के बाद ही सत्य या वास्तविकता का ज्ञान हो जाता है | ज्ञान अर्जित होने के बाद व्यक्ति स्वयं ही अपने उद्देश्यों या लक्ष्यों की प्राप्ति कर सकता है |

सुकरात के शब्दों में “वह व्यक्ति जिसे सच्चा ज्ञान है सद्गुणी के सिवाय और कुछ हो सकता |” (“one who had true knowledge could not be other than virtuous” – Socrates)    

9. वातावरण के साथ अनुकूलन का उद्देश्य : Adaptation of Situation Aim

शिक्षा का एक अन्य उद्देश्य व्यक्ति को वातावरण के साथ अनुकूलन प्रदान करना भी है | कोई भी व्यक्ति तभी अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है जब वह विपरीत परिस्थितियों को भी अपने अनुकूल बना ले और यह कार्य शिक्षा द्वारा ही सम्भव है |

शिक्षा के द्वारा ही व्यक्ति परिवर्तनशील समाज की हर परिस्थिति में स्वयं को सक्षम बनाकर अपना तथा समाज का विकास करता है | इस प्रकार शिक्षा का उद्देश्य बालक में वातावरण (परिस्थिति) से अनुकूलन करने की क्षमता पैदा करना है |

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10. नेतृत्व शक्ति के विकास का उद्देश्य : Development of Leadership Aim

शिक्षा का एक अन्य उद्देश्य बालक में नेतृत्व शक्ति का विकास करना भी है | नेतृत्व शक्ति के विकास होने पर ही बालक अपने लक्ष्यों की प्राप्ति कर सकता है |

आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कुशल नेतृत्व की आवश्यकता है, जिसकी पूर्ति शिक्षा द्वारा ही सम्भव है | नेतृत्व शक्ति बालक के सर्वांगीण विकास में भी योगदान देती है |

11. राष्ट्रीयता की भावना के विकास का उद्देश्य : Development of Nationalism Aim

शिक्षा का एक प्रमुख उद्देश्य बालक में राष्ट्रीयता की भावना का विकास करना भी है | माध्यमिक शिक्षा आयोग (1952-53) के अनुसार, ‘हमारी शिक्षा को ऐसी आदतों और दृष्टिकोणों का विकास करना चाहिए जो नागरिकों को इस योग्य बना दे कि वे जनतंत्रीय नागरिकता के उत्तरदायित्वों को वहन करके विघटनकारी प्रवृत्तियों का विरोध कर सके जो व्यापक राष्ट्रीय व धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण के विकास में बाधा डालती है |” [“Educational system must make its contribution in the development of habits, attitudes and qualities of character, which will enable its citizen to bear worthely and responsibilities of democratic citizenship and to counteract all those fissiparious tendencies which hinder the emergence of a broad national and secular outlook.” – Secondary Education Commission]

शिक्षा बालक में राष्ट्र-प्रेम, राष्ट्रीय आदर्श व राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करके राष्ट्रीय भावना पैदा करती है | उसे देश के संविधान का ज्ञान करती है तथा उसमे नागरिक गुणों का विकास करती है |

शिक्षा द्वारा ही राष्ट्रीय एकता के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सकता है | शिक्षा द्वारा राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करके अलगाववाद और आतंकवाद जैसी समस्याओं से निपटा जा सकता है |

कोई राष्ट्र तभी विकास कर सकता है जब उसके नागरिकों में भी राष्ट्रीय भावना का विकास हो | यह सब शिक्षा द्वारा ही सम्भव है |

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12. अंतर्राष्ट्रीयता की भावना के विकास का उद्देश्य : Development of Internationalism Aim

शिक्षा का एक अन्य उद्देश्य बालक में अंतर्राष्ट्रीयता की भावना का विकास करना भी है | आज के समय में बालक में राष्ट्रीयता की भावना के साथ साथ अन्तर्राष्ट्रीयता की भावना का विकास भी होना आवश्यक है |

आज एक देश में घटने वाली घटना का असर दूसरे देशों पर भी पड़ता है | अपने देश का विकास हम तभी कर सकते है जब हम दूसरे देशों के प्रति उदार भावना रखे | विश्व में शांति व सहयोग पैदा करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय भावना का विकास शिक्षा द्वारा ही सम्भव है |

शिक्षा ही एक ऐसा आसान साधन है, जो लोगों का ध्यान अंतर्राष्ट्रीयता की भावना ओर आकर्षित कर सकती है | ‘वसुधैव-कुटुम्बकम्’ व ‘विश्व-बन्धुत्व’ की भावना से ही सम्पूर्ण मानव-जाति का विकास सम्भव है |

सम्पूर्ण मानव-जाति की एकता के लिए अंतर्राष्ट्रीयता की भावना का विकास अतिआवश्यक है | ओलिवर गोल्डस्मिथ के शब्दों में “अन्तर्राष्ट्रीयता एक भावना है जिसके अनुसार व्यक्ति केवल अपने राष्ट्र का ही सदस्य नही होता बल्कि विश्व का नागरिक भी होता है |”[“Internationalism is a feeling that the individual is not only a member of his state, but a citizen of the world. – Oliver Goldsmith”]

विद्यादूत (vidyadoot) में निम्न टॉपिक्स पर भी लेख उपलब्ध है-

  • Shiksha Ke Siddhant / Shiksha ka Arth
  • Shiksha Ke Uddeshya Par Nibandh
  • Shiksha Ke Prabhavi Karak
  • Shiksha Ke Prakar / Shiksha ka Mahatva
  • Shiksha Ke Sadhan / Aims of Education in Hindi
  • Shiksha ke Karya
  • Shiksha Ke Bare Main
  • Shiksha Ke Samajik Uddeshya
  • Shiksha Ke Abhikaran
  • Shiksha Ke Aupcharik Sadhan

13. जीविकोपार्जन का उद्देश्य : Vocational Aim

शिक्षा का उद्देश्य मानव को जीविकोपार्जन के योग्य बनाना भी है | जीविकोपार्जन के उद्देश्य का अर्थ है कि शिक्षा व्यक्ति को इस काबिल बना दे कि वह अपने तथा अपने परिवार की ‘रोटी कपड़ा और मकान’ की पूर्ति कर सके |

ये व्यक्ति की प्रारम्भिक आवश्यकताएँ है | जीविकोपार्जन का उद्देश्य बेरोजगारी की समस्या का निदान करता है और व्यक्ति को व्यावसायिक कुशलता प्रदान करता है | जीविकोपार्जन के उद्देश्य को ध्यान में रखकर दी जाने वाली शिक्षा अर्थपूर्ण होती है |

महात्मा गाँधी लिखते है कि “सच्ची शिक्षा बालक व बालिकाओं हेतु बेरोजगारी के विरुद्ध एक प्रकार का बीमा होना चाहिए |”[True education ought to be for boys and girls a kind of insurance against unemployment. – Mahatma Gandhi]

जीविकोपार्जन के उद्देश्य को ‘व्यावसायिक उद्देश्य’(Vocational Aim), ‘दाल-रोटी का उद्देश्य’ (Bread and Butter Aim), व्हाइट-कालर उद्देश्य (White-Collar Aim) और ब्लू-जैकिट उद्देश्य (Blue-Jacket Aim) भी कहते है |

14. अवकाश-काल के सदुपयोग का उद्देश्य : Utilization of Leisure-Time Aim

शिक्षा का एक अन्य उद्देश्य अवकाश-काल के सदुपयोग भी है | अवकाश-काल का अर्थ है वह समय जब व्यक्ति अपने कार्यो को करने के लिए स्वतन्त्र होता है अर्थात् किसी दूसरे के कार्य करने के लिए बाध्य नही होता है |

अवकाश-काल में व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार अध्ययन, चिन्तन और मनन करने का अवसर मिलता है | शिक्षा व्यक्ति को अवकाश-काल के सदुपयोग में सहायता प्रदान करती है | शिक्षा अवकाश-काल के सदुपयोग व दुरुपयोग में भेद का ज्ञान कराती है |

15. जीवन को सम्पूर्णता प्रदान करने का उद्देश्य : Complete Living Aim

शिक्षा का एक अन्य उद्देश्य व्यक्ति के जीवन को सम्पूर्णता प्रदान करना भी है | शिक्षा व्यक्ति के जीवन को सम्पूर्णता प्रदान करती है जिससे उसके व्यक्तित्व के सम्पूर्ण पक्षों का विकास होता है और वह जीवन के सभी क्षेत्रो में कार्य करने के योग्य बनता है |

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