Aadarshwad Aur Shiksha : आदर्शवाद और शिक्षा

Aadarshwad Aur Shiksha
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आदर्शवाद और शिक्षा (Aadarshwad Aur Shiksha) : विद्यादूत के इस लेख में हम आदर्शवाद और शिक्षा (Idealism and Education) पर चर्चा करेंगें | इस लेख के अंत में आदर्शवाद से सम्बन्धित अन्य महत्वपूर्ण लेख दिए गये है, उन्हें भी आप जरुर देखें | शिक्षा के बारे में विस्तार से हम पहले ही कुछ लेख प्रस्तुत कर चुके है, जिन्हें आप यहाँ (शिक्षा के बारे में) पर क्लिक करके देख सकते है | प्राचीनकाल से ही शिक्षा विभिन्न दार्शनिक विचारधाओं से प्रभावित होती रही है, परन्तु शिक्षा पर सर्वाधिक प्रभाव आदर्शवाद का ही पड़ा है |

आदर्शवादी विचारधारा ने शिक्षा को अत्यधिक प्रभावित किया है | प्राचीन भारत में शिक्षा आध्यात्मिक थी जो आदर्शवादी विचारधारा को व्यक्त करती है | पाश्चात्य जगत में सुकरात, प्लेटो व अरस्तु महान आदर्शवादी शिक्षक थे | उनकी शिक्षाओं ने आदर्शवादी शिक्षा-व्यवस्था के निर्माण में अत्यंत योगदान दिया |

आधुनिक काल में आदर्शवाद का शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग करने वाले पाश्चात्य दार्शनिकों में इटली के जेन्टिले, जर्मनी के पेस्टालाजी, फ्रोबेल और हरबर्ट, अमेरिका के हर्मन एच. हॉर्न, इंग्लैंण्ड के टी. पी. नन आदि तथा भारत के स्वामी विवेकानन्द, अरविन्द घोष, महात्मा गाँधी, रविन्द्रनाथ टैगोर आदि प्रमुख है |

आदर्शवादियों का मानना है कि शिक्षा एक “चेतना या बौद्धिक प्रक्रिया” है, जो बालक को एक प्राकृतिक प्राणी से आध्यात्मिक प्राणी बनाने के लिए उनमे सद्गुणों का विकास करती है | आदर्शवादी शिक्षा बालक को आत्मानुभूति करने का अवसर प्रदान करती और उनके चरित्र निर्माण में सहायता करती है | अतः आदर्शवादियों के अनुसार “शिक्षा वह बौद्धिक व चेतनापूर्ण प्रक्रिया है, जिसमे शिक्षक द्वारा शिक्षार्थी को आत्मानुभूति करायी जाती है |”

आदर्शवादी शिक्षा मानव के लिए अतिआवश्यक है | यह समाज में आध्यात्मिकता, नैतिकता, सामाजिकता, लोक-कल्याण की भावना आदि की वृद्धि में अत्यन्त सहायक है | यह राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय एकता में भी सहायक है |

आदर्शवादी शिक्षा की महत्ता व्यक्त करते हुए एच.एच. हॉर्न लिखते है कि “आदर्शवादी शिक्षा दर्शन वह स्वरुप प्रदान करता है जिसमें मानव अपने आपको मानसिक विश्व का अभिन्न अंग समझने लगता है |”[“An idealistic philosophy of education that is an account of finding himself as an intigral part of universe mind. Herman H. Horne]

आदर्शवाद और शिक्षा (Aadarshwad Aur Shiksha) : आदर्शवादी बालक में सद्गुणों का विकास करने वाली शिक्षा को ही वास्तविक मानते है | आदर्शवादी विचारकों ने शिक्षा का अर्थ निम्न प्रकार से प्रकट किया है –

प्लेटो – “शिक्षा से मेरा अभिप्राय उस प्रशिक्षण से है, जो बालकों में उचित आदतों के निर्माण द्वारा सद्गुण की प्रथम प्रवृत्ति उत्पन्न करता है |

अरस्तु – “स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निर्माण ही शिक्षा है |”

रस्क – “शिक्षा के द्वारा आध्यात्मिकता का क्षेत्र विशाल बन जाता है और उसके द्वारा जाति के विचारों व संस्कृति की सुरक्षा की जाती है और उसे नई परिस्थितियों के ढांचे में ढालकर गतिशील बनाया जाता है |”

पेस्टालॉजी – “शिक्षा मानव की जन्मजात शक्तियों का स्वाभाविक, सामंजस्यपूर्ण और प्रगतिशील विकास है |”

इमान्युएल कान्ट – “संसार में सफल होने की योग्यता प्राप्त करना शिक्षा नही है, बल्कि मानवता के आदर्श समाज के लिए तैयारी ही शिक्षा है |” [To achieve the ability to succed in the world is not education but education is the preparation for a ideal society of humanity. – Immanuel Kant]

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आदर्शवाद से सम्बन्धित अन्य लेख –

1 आदर्शवाद क्या है (What is Idealism)

2. आदर्शवाद का अर्थ और परिभाषाएं (Aadarshwad Ka Arth Aur Paribhashayen)

3. आदर्शवाद के रूप (Aadarshwad Ke Roop)

4. आदर्शवाद के मूल सिद्धांत (Aadarshwad Ke Mool Siddhant)

5. आदर्शवाद और शिक्षा के उद्देश्य (Aadarshwad Aur Shiksha Ke Uddeshya)  

6. आदर्शवाद और पाठ्यचर्या (Aadarshwad Aur Pathyacharya)  

7. आदर्शवाद और शिक्षण विधियाँ (Aadarshwad Aur Shikshan Vidhiyan)

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