Aadarshwad Ke Roop : आदर्शवाद के रूप

Aadarshwad Ke Roop
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आदर्शवाद के रूप (Aadarshwad Ke Roop) : विद्यादूत के इस लेख में हम “आदर्शवाद के रूप” पर चर्चा करेंगे | आप इस लेख के अंत में दिए गये आदर्शवाद से सम्बन्धित लेखों को जरुर पढ़ें | पाश्चात्य दर्शन में आदर्शवाद एक प्राचीन विचारधारा है | सर्वप्रथम आदर्शवादी विचारधारा की उपस्थिति यूनानी दार्शनिक थेल्स के विचारों में दिखाई देती है | फिर यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात ने इस दार्शनिक विचारधारा को आगे बढ़ाया लेकिन एक दर्शन के रूप में आदर्शवाद को व्यवस्थित करने का श्रेय प्लेटो को जाता है | प्लेटो ने विचारों, जिसे वे प्रत्यय का नाम देते थें, की सत्ता को स्वीकारा था | इसीलिए इसे ‘विचारवाद’ कहा गया | प्लेटो के पश्चात् उनके शिष्य अरस्तु ने उनकी विचारधारा को कुछ अपने तरीके से आगे बढ़ाया | अरस्तु ने विचारों के जगत के साथ साथ वस्तुजगत के अस्तित्व को भी स्वीकारा |

समय के साथ आदर्शवाद के विभिन्न रूप आस्तित्व में आये | जेम्स एस. रॉस लिखते है कि “आदर्शवादी दर्शन के अनेक और विविध रूप है लेकिन सबका आधारभूत सार यही है कि विश्व का उत्पादन कारण मन या आत्मा है तथा मानसिक स्वरुप ही वास्तविक सत्य है |”

आदर्शवाद के रूप (Aadarshwad Ke Roop)

आदर्शवाद के रूप (Aadarshwad Ke Roop) निम्नलिखित है –

1. नैतिक आदर्शवाद (Moralistic Idealism) : प्लेटो का नैतिक आदर्शवाद (Moralistic Idealism)

2. आत्मनिष्ट आदर्शवाद (Subjective Idealism) : जार्ज बर्कले का आत्मनिष्ठ आदर्शवाद (Subjective Idealism)

3. बुद्धिवादी आदर्शवादी (Intellectual Idealism) : इमान्युएल कान्ट का बुद्धिवादी आदर्शवाद (Intellectual Idealism)

4. निरपेक्ष आदर्शवाद (Absolute Idealism) : जॉर्ज विल्हेल्म फ्रेडरिक हेगेल का निरपेक्ष आदर्शवाद (Absolute Idealism)

5. बहुतत्ववादी आदर्शवाद (Pluralistic Idealism) : गॉटफ्रिड विल्हेल्म लाइबनित्ज का बहुतत्ववादी आदर्शवाद (Pluralistic Idealism)

अब हम आदर्शवाद के रूप (Aadarshwad Ke Roop) पर विस्तार से चर्चा करेंगें –

1. प्लेटो का नैतिक आदर्शवाद (Moralistic Idealism)

नैतिक आदर्शवाद का प्रतिपादन यूनानी दार्शनिक प्लेटो (Plato) ने किया था | विचार प्लेटो के दर्शन का केन्द्र-बिन्दु है | यह समस्त जगत् का आधार है |

जगत् की सभी वस्तुओं की उत्पत्ति इसी से होती है | प्लेटो ने विचारों को मूल तत्व माना है और विचारों की नैतिक व्यवस्था को स्वीकार किया है |

प्लेटो के अनुसार विचारों में एक ईश्वरीय और नैतिक व्यवस्था होती है, जिसकी सहायता से ईश्वर इस सम्पूर्ण विश्व का निर्माण करता है |

विचारों की नैतिक व्यवस्था में विश्वास करने के कारण प्लेटों की आदर्शवादी विचारधारा ‘नैतिक आदर्शवाद’ कहलाती है | 

2. जार्ज बर्कले का आत्मनिष्ठ आदर्शवाद (Subjective Idealism)

आत्मनिष्ट आदर्शवाद का प्रतिपादन आयरलैंड के दार्शनिक जार्ज बर्कले (George Berkeley) ने किया था | उनकें अनुसार वस्तु के अस्तित्व का ज्ञान केवल मन (आत्मा) के कारण होता है, वस्तु का स्वयं में कोई अस्तित्व नही होता है |

सत्य वास्तविकता मन ही है | बाह्य जगत् केवल मन का प्रत्यक्षीकरण है | बर्कले के अनुसार संसार एक मानसिक जगत् है जहाँ पर विचारों का सर्वोच्च स्थान है | बर्कले की इस विचाधारा को आत्मनिष्ठ आदर्शवाद कहा जाता है |     

3. इमान्युएल कान्ट का बुद्धिवादी आदर्शवाद (Intellectual Idealism)

बुद्धिवादी आदर्शवाद का प्रतिपादन जर्मनी के दार्शनिक इमान्युएल कान्ट (Immanuel Kant) ने किया था | कान्ट की प्रसिद्ध उक्ति है – ‘बुद्धि प्रकृति को नियमित करती है |’ बुद्धि ही प्रकृति के असम्बद्ध व क्षणिक सम्वेदनों को सम्बद्ध, व्यवस्थित व नियमित ज्ञान का रूप देकर प्राकृतिक नियमों में सार्वभौमता और अनिवार्यता लाती है |

बुद्धि ही प्रकृति को नियमित करके उसे हमारे ज्ञान का विषय बनती है | बुद्धि के कारण ही हमारे व्यावहारिक ज्ञान में सार्वभौम निश्चय व अनिवार्यता आती है | कान्ट की आदर्शवादी विचारधारा बुद्धिवादी आदर्शवाद कहलाती है |    

4. जॉर्ज विल्हेल्म फ्रेडरिक हेगेल का निरपेक्ष आदर्शवाद (Absolute Idealism)

निरपेक्ष आदर्शवाद का प्रतिपादन जर्मनी के जॉर्ज विल्हेल्म फ्रेडरिक हेगेल (George Wilhelm Friedrich Hegel) ने किया था | हेगेल के अनुसार जीवात्मा व प्रकृति दोनों का मूल स्रोत परमतत्व है |

यह परमतत्व जोव व जगत् का समन्वय रूप है | परमतत्व निरपेक्ष विचाररूप अथवा शुद्ध चैतन्यरूप है |

हेगल के अनुसार एकमात्र परमतत्व निरपेक्ष या पूर्ण विचार है | सम्पूर्ण विश्व इसी का परिणाम है | प्रत्येक पदार्थ उसी की सत्ता से अनुप्राणित है और अपने सीमित रूप में उसी की अभिव्यक्ति करता है | हेगल की आदर्शवादी विचारधारा निरपेक्ष आदर्शवाद कहलाती है |

5. गॉटफ्रिड विल्हेल्म लाइबनित्ज का बहुतत्ववादी आदर्शवाद (Pluralistic Idealism)

बहुतत्ववादी आदर्शवाद का प्रतिपादन जर्मनी के दार्शनिक गॉटफ्रिड विल्हेल्म लाइबनित्ज (Gottfried Wilhelm Leibnitz) ने किया था | लाइबनित्ज ने विश्व के प्रत्येक पदार्थ में एक स्वतंत्र आध्यात्मिक तत्व ‘चिदणु’ (Monad) की सत्ता स्वीकार की है | उनकें अनुसार यह विश्व अनेक चिदणु से बना है |

लाइबनित्ज का चिदणु चेतन है और अपनी शक्ति का स्वयं केन्द्र है | यह अनादि, अनन्त, नित्य व स्वयं में पूर्ण है |

विश्व में ऐसे असंख्य चिदणु है | प्रत्येक चिदणु, अपनी स्वतन्त्र सत्ता या शक्ति रखते हुए भी, अपने मौलिक स्वतन्त्र में, अन्य समस्त चिदणुओं के समान है |

परम चिदणु (ईश्वर) चिदणुओं का स्रष्टा है | अनेक चिदणु की सत्ता स्वीकार करने के कारण उनकी आदर्शवादी विचारधारा बहुतत्ववादी आदर्शवाद कहलाती है |

तत्वों के आधार पर आदर्शवाद के रूप

प्रकार   प्रवर्तकतत्व
नैतिक आदर्शवादप्लेटोविचार
आत्मनिष्ट आदर्शवादबर्कलेमन या आत्मा
बुद्धिवादी आदर्शवादीकान्टबुद्धि
निरपेक्ष आदर्शवादहेगेलपरमतत्व (जीवात्मा व प्रकृति दोनों)
बहुतत्ववादी आदर्शवादलाइबनित्जचिदणु (मोनाड)

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