UGC NET Paper 1 Study Material PDF in Hindi

UGC NET Paper 1 Study Material in Hindi

यूजीसी-नेट परीक्षा (UGC-NET EXAM) को क्वालीफाई करने के लिए इसके प्रथम प्रश्नपत्र (शिक्षण और शोध अभिवृत्ति) पर फोकस करना सबसे अधिक जरूरी होता है | UGC NET Paper 1 Study Material PDF in Hindi, यूजीसी नेट के प्रथम पेपर शिक्षण और शोध अभिवृत्ति (Teaching and Research Aptitude) का मुख्य उद्देश्य कैंडिडेट्स की शिक्षण और शोध क्षमता का पूर्ण मूल्यांकन करना है | परीक्षार्थियों (कैंडिडेट्स) से अपेक्षा कि जाती है कि उनके पास संज्ञानात्मक क्षमता (Cognitive Abilities) हो और वें इसको प्रदर्शित कर सकें | संज्ञानात्मक क्षमता (Cognitive Abilities) में में विस्तृत बोध (Comprehension), आगमनात्मक व निगमानात्मक तर्क (Deductive and Inductive Reasoning), तर्क संरचना की समझ (Evaluation understanding the Structure of Arguments), विश्लेषण (Analysis) शामिल है |

UGC NET Paper 1 Study Material PDF in Hindi टॉपिक पर इन सभी बातों पर फोकस किया गया है | UGC NET Study Material PDF (Research Methodology Net Notes) में विभिन्न बिन्दुओं पर समान रूप से ध्यान दिया गया है, Net Paper 1 Study Material in Hindi |

NTA UGC NET Paper 1 Study Material pdf in Hindi : आपको ध्यान रखना है कि नेट (यूजीसी नेट) के प्रथम पेपर (UGC NET NTA Paper 1) द्वारा कैंडिडेट्स से यह भी अपेक्षा की जाती है कि उन्हें हायर एजुकेशन में शिक्षण और अधिगम (Teaching and Learning Process) का सामान्य ज्ञान (General Awareness) प्राप्त हो | Study Material for Net Paper 1 |

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साथ ही, उन्हें सूचना के स्रोतों का ज्ञान और सामान्य जानकारी हो | इसके आलावा उन्हें जन, पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधनों की अंतर्क्रिया (Interaction between People, Environment, Natural Resources) और जीवन की गुणवत्ता पर उसके प्रभावों (their impact on the quality of life) का भी ज्ञान हो | UGC NET Teaching Aptitude |

UGC NET Paper 1 Study Material PDF in Hindi (Research Methodology Net Notes) टॉपिक में इन बिन्दुओं पर चर्चा की गयी है | UGC Net paper 1 study material pdf or UGC Net study material paper 1 |

UGC NET Paper First Study Material in Hindi

विद्यादूत में यूजीसी-नेट पर दो पॉपुलर पोस्ट पहले से ही मौजूद है आप उनके एक बार जरुर देखें –

वर्तमान में यूजीसी नेट परीक्षा (UGC NET Examination) का आयोजन एनटीए (NTA-National Testing Agency) द्वारा किया जा रहा है | जून 2018 तक सीबीएससी (CBSC) ने यूजीसी नेट परीक्षा का आयोजन किया था | UGC NET Paper 1 Study Material in Hindi (ugc net study material for paper 1) में UGC NET 2020 Exam पर फोकस किया गया है | UGC NET Teaching Aptitude Questions and Answers PDF |

UGC NET Exam Pattern : UGC NET Study Material in Hindi

यूजीसी नेट (UGC NET 2020) की संशोधित स्कीम के अनुसार अब यूजीसी नेट परीक्षा में 2 पेपर आते है | यूजीसी नेट पेपर फर्स्ट (UGC NET Paper First), जिसका शीर्षक शिक्षण और शोध अभिवृत्ति (Teaching and Research Aptitude) है, सभी विषयों के कैंडिडेट्स के लिए अनिवार्य प्रश्नपत्र है |

इसमे कुल 50 प्रश्न वस्तुनिष्ठ प्रकार आयेंगें और वे सभी प्रश्न अनिवार्य होंगें | प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का होगा |

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जबकि यूजीसी नेट पेपर 2 (UGC NET NTA Paper Second) में कैंडिडेट्स द्वारा चयनित विषय पर आधारित 100 प्रश्न वस्तुनिष्ठ प्रकार के आयेंगें | इसमे प्रत्येक प्रश्न 2 अंक होगा | सभी प्रश्न अनिवार्य होंगें |

प्रश्नपत्रअंकप्रश्नों की संख्यासमय
110050 प्रश्न वस्तुनिष्ठ (सभी अनिवार्य)3 घंटें (दोनों प्रश्नपत्रों के लिए)
2200200 प्रश्न वस्तुनिष्ठ (सभी अनिवार्य)

UGC NET GENERAL PAPER : TEACHING AND RESEARCH APTITUDE

यूजीसी नेट पेपर 1 (UGC NET Paper 1) के पूरे सिलेबस को 10 यूनिट (Unit) में विभाजित किया गया है | हर यूनिट से 2-2 मार्क्स वाले 5 प्रश्न आयेंगें |

UGC NET Study Material for Paper 1 in Hindi (यूजीसी नेट पेपर 1 स्टडी मटेरियल इन हिन्दी) में इस सभी यूनिट से महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किये गये हैं |

UNIT-1शिक्षण अभिवृत्ति Teaching Aptitude
UNIT-2शोध अभिवृत्ति Research Aptitude
UNIT-3बोध Comprehension
UNIT-4संप्रेषण Communication
UNIT-5गणितीय तर्क और अभिवृत्ति Mathematical Reasoning and Aptitude
UNIT-6युक्तियुक्त तर्क Logical Reasoning
UNIT-7आंकड़ों की व्याख्या Data Interpretation
UNIT-8सूचना और संचार प्रोद्योगिकी Information and Communication Technology (ICT)
UNIT-9लोग, विकास और पर्यावरण People Development and Environment
UNIT-10उच्च शिक्षा प्रणाली Higher Education System

UGC NET Paper 1 Study Material PDF in Hindi

एनटीए यूजीसी नेट की संशोधित स्कीम के अनुसार यूजीसी नेट पेपर 1 बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया है |

संशोधित स्कीम के पहले यूजीसी नेट में तीनों पेपर को मिलाकर कुल 175 प्रश्नों होते थें, जिसमे पेपर 1 में 50 प्रश्न करने को आते थें,जोकि 28.57% बनता था |

लेकिन अब यूजीसी नेट की संशोधित स्कीम के अनुसार राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (National Eligibility Test) में दो पेपर में कुल 150 प्रश्न होंगें, जिसमे यूजीसी नेट पेपर 1 में 50 प्रश्न होंगें, जोकि 33.33% बनता है |

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आपको यह ध्यान रखना है कि अब यूजीसी नेट परीक्षा (UGC-NET Examination) का समय भी कम कर दिया गया है, जिसके कारण यूजीसी नेट पेपर-1 ज्यादा चुनौतीपूर्ण बन गया है |

इसलिए आपको राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट परीक्षा) के पेपर-1 (यूजीसी नेट पेपर 1) पर ज्यादा-ज्यादा ध्यान देना है |

UGC NET PAPER 1 SYLLABUS 2020 PDF IN HINDI

NTA UGC NET PAPER FIRST STUDY MATERIAL को पढ़ने के साथ आपको UGC NET PAPER 1 SYLLABUS 2020 को भी पूरा देख लेना चाहिए | आपकी सुविधा के लिए नीचे यूजीसी नेट पेपर 1 सिलेबस हिन्दी और इंग्लिश पीडीएफ में दिए गये है |

आप नीचे दिए गये लिंक से UGC NET PAPER 1 SYLLABUS 2020 PDF IN HINDI और UGC NET PAPER 1 SYLLABUS 2020 PDF IN ENGLISH को DOWNLOAD कर सकते है : UGC NET Syllabus Paper 1, UGC NET Syllabus in Hindi, UGC NET New Syllabus –

  1. UGC NET PAPER 1 SYLLABUS 2020 PDF IN HINDI
  2. UGC NET PAPER 1 SYLLABUS 2020 PDF IN ENGLISH
  3. UGC NET EXAM SYLLABUS FOR ALL SUBJECTS

UGC NET TEACHING AND RESEARCH APTITUDE STUDY MATERIAL

शिक्षण अभिवृत्ति से सम्बन्धित चार प्रमुख टॉपिक्स विद्यादूत में पहले ही पोस्ट किये जा सकते है, जिन्हें आप नीचे देख सकते है –

Study Material For UGC NET Paper 1 PDF in Hindi : यूजीसी नेट पेपर 1 स्टडी मटेरियल इन हिन्दी

शिक्षण का क्या अर्थ है ?

  • शिक्षण का अर्थ शिक्षा प्रदान करना है |
  • शिक्षण एक सामाजिक घटना (Phenomena) है |
  • शिक्षण का प्रमुख उद्देश्य अधिगम (Learning) होता है |
  • बर्टन के अनुसार शिक्षण, अधिगम हेतु प्रेरणा पथ-प्रदर्शन, पथ निर्देशन व प्रोत्साहन है [Burton – Teaching is the stimulation, guidance, direction & encouragement of learning.]

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अच्छे शिक्षण की विशेषताएं – Characteristics of Good Teaching

  1. अच्छा शिक्षण बाल-केन्द्रित और मनोवैज्ञानिक होता है |
  2. अच्छा शिक्षण निदानात्मक व उपचारात्मक होता है |
  3. अच्छा शिक्षण निर्देशात्मक (suggestive) होता है |
  4. अच्छा शिक्षण प्रेरणादायक (stimulating) होता है |
  5. अच्छा शिक्षण सहयोग पर आधारित होता है |

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शिक्षण को प्रभावित करने वाले कारक : Factors Affecting Teaching

  • विषयवस्तु : Subject Matter
  • शिक्षक की शैक्षिक योग्यता : Educational Qualification of Teacher
  • शिक्षक का अनुभव : Experience of Teacher
  • शिक्षण कौशल : Teaching Skills
  • कक्षा का वातावरण : Environment of Classroom
  • समाज और माता-पिता की अपेक्षाएं : Expectations of Society and Parents

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स्मृति क्या है ? : What is memory ?

स्मृति एक जटिल मानसिक प्रक्रिया है | अचेतन मन में संचित अनुभवों के चेतन मन में आने की प्रक्रिया स्मृति कहलाती है |

  • वुडवर्थ के अनुसार “स्मृति सीखी हुई वस्तु का प्रत्यक्ष उपयोग है [Woodworth – Memory is the direct use of what is learned.]”
  • मैक्डूगल के अनुसार “स्मृति से तात्पर्य है, अतीत की घटनाओं के अनुभवों की कल्पना करना और इस तथ्य को पहचान लेना कि ये अतीतकाल का अनुभव है |”
  • नन के अनुसार “हमारे अनुभवों को संचित करके रहने वाली शक्ति जब चेतना से युक्त होती है, तब वह स्मृति कहलाती है |

अच्छी स्मृति की विशेषाएंCharacteristics of Good Memory

  • जल्द याद होना – quick learning
  • अच्छी धारण शक्ति – good retention
  • जल्द पुनः स्मरण – quick recall
  • जल्द व स्पष्ट पहचाना – quick and accurate of recognition
  • अनावश्यक बातों को भूलना – forgetting of meaningless things

स्मृति के प्रकारTypes of Memory

  • वास्तविक स्मृति (True Memory) – विषयवस्तु को क्रमबद्ध रूप से याद रखना | इसमे स्मरण की गयी विषय-वस्तु का क्रमबद्ध ज्ञान स्थायी बना रहता है और जल्द पुनः स्मरण हो जाता है | वास्तविक स्मृति को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है |
  • स्थायी स्मृति (Permanent Memory) – सीखी गयी बातों को लम्बे समय तक याद रखना |
  • तात्कालिक स्मृति (Immediate Memory) – किसी बात/तथ्य को याद करके तत्काल (तुरंत) सुना देना |
  • सक्रिय स्मृति (Active Memory) – पूर्व-अनुभवों को प्रयासपूर्वक पुनः स्मरण करना | जैसे – परीक्षा के समय पूर्व-अनुभवों को प्रयासपूर्वक स्मरण करके उत्तर लिखना |
  • निष्क्रिय स्मृति (Passive Memory) – पूर्व-अनुभवों को अचानक बिना प्रयास के पुनः स्मरण करना | जैसे – टेलीविजन का नाम लेने पर टीवी स्क्रीन की याद आ जाना |
  • यांत्रिक स्मृति (Rote Memory) – रट कर पुनः स्मरण करना | जैसे पहाड़ा, फार्मूला आदि याद करना |
  • व्यक्तिगत स्मृति (Personal Memory) – स्वयं के पूर्व-अनुभवों को पुनः स्मरण करना | जैसे किसी घटना को देखकर स्वयं से सम्बन्धित कोई घटना का याद आना |
  • अव्यक्तिगत स्मृति (Impersonal Memory) – स्वयं के पूर्व-अनुभवों के अतिरिक्त अन्य किसी के माध्यम से प्राप्त अनुभवों का स्मरण | जैसे – किसी मित्र, पत्र-पत्रकाओं, पुस्तक आदि के माध्यम से प्राप्त अनुभवों को स्मरण करना |
  • शारीरिक स्मृति (Physical Memory) – किसी कार्य को बार-बार करने से सम्बन्धित अंगों का कार्य करने की आदत पड़ जाना | जैसे- टाइपिंग करते समय उंगलियों का स्वयं शब्दों पर पड़ना |
  • तार्किक स्मृति (Logical Memory) – इसे बौद्धिक स्मृति की कहा जाता है | किसी तथ्य को विचार-पूर्वक सीख कर स्मरण करना और आवश्यकता पड़ने पर उसे बता देना |
  • आदतजन्य स्मृति (Habit Memory) – बार बार दोहराकर, उसे आदत में बदलकर स्मरण करना |
  • इंद्रिय-अनुभव स्मृति (Sense Impression Experience) – अपनी ज्ञानेन्द्रियों के अनुभव के द्वारा पुनः स्मरण करना | जैसे आँख बंद करके किसी वस्तु को छूकर, सूंघकर बता देना |

स्मृति के चार तत्व कौन से है ?

  • अधिगम (Learning) : वुडवर्थ के अनुसार नवीन ज्ञान व नवीन प्रतिक्रियाओं को प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिगम की प्रक्रिया है |
  • धारण (Retention) : धारण मस्तिष्क की वह शक्ति है जो हमे स्मरण किये हुए विषयों को मस्तिष्क में रोके रखने में सक्षम बनाती है | वुडवर्थ के अनुसार धारण एक ऐसी स्थिति है, जिसमे प्रत्येक वस्तु, जो सीखी गयी है, जब तक कि पुनः सक्रिय न हो, पड़ी रहती है | धारण-शक्ति को प्रभावित करने वाले चार कारण है – (1) मस्तिष्क (2) स्वास्थ्य (3) अभिरुचि (4) चिन्तन
  • प्रत्याह्वन या पुनः स्मरण (Recall) : पूर्व अनुभवों को चेतना में आना पुनः स्मरण कहलाता है |
  • प्रत्यभिज्ञा या पहचान (Recognition) : वुडवर्थ के अनुसार पूर्व अनुभवों को जानना ही पहचान है, अथवा वर्तमान काल में उस वस्तु से परिचित होना जिससे कि भूतकाल में परिचित हो चुके है |

शिक्षण के तीन स्तर क्या है ? : What are three levels of teaching

  • स्मृति स्तर (memory level)
  • अवबोध स्तर या ग्रहण शक्ति स्तर (understanding level)
  • चिन्तन स्तर या विमर्शी स्तर (reflective level)

शिक्षण का स्मृति स्तर क्या है ?

  • शिक्षण के स्मृति स्तर के प्रमुख प्रस्तावक हर्बर्ट (Herbert) हैं |
  • शिक्षण का स्मृति स्तर शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process) का पहला चरण है |
  • शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया मूलतः उद्दीपक-अनुक्रिया (Stimulus-Response) मानी जाती है |
  • शिक्षण के स्मृति स्तर पर मूल्यांकन प्रणाली में प्रमुख रूप से लिखित, मौखिक और निबंध प्रश्नों की परीक्षा को शामिल किया जाता है |

शिक्षण का अवबोध स्तर या ग्रहण शक्ति स्तर क्या है ?

  • शिक्षण के अवबोध स्तर के प्रमुख प्रस्तावक मॉरिसन (Morrison)
  • इसका उद्देश्य विषय-वस्तु को न केवल स्मरण रखना बल्कि उसे समझना भी है |
  • शिक्षण का अवबोध स्तर छात्रों के बौद्धिक विकास के लिए अधिकतम अवसर प्रदान करना है |
  • शिक्षण का अवबोध स्तर शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों के लिये विषय-वस्तु को आत्मसात करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |

शिक्षण का चिन्तन स्तर या विमर्शी स्तर क्या है ?

  • शिक्षण के चिन्तन स्तर या विमर्शी स्तर के प्रमुख प्रस्तावक हंट (Hunt) है |
  • शिक्षण का चिन्तन स्तर या विमर्शी स्तर शिक्षण का उच्चतम स्तर है |
  • शिक्षण का चिन्तन स्तर शिक्षण का समस्या-केन्द्रित दृष्टिकोण है |
  • शिक्षण के स्मृति स्तर व अवबोध स्तर दोनों शिक्षण के चिन्तन स्तर के आधार है |

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अधिगम क्या है ? What is Learning ?

अधिगम अर्थात् सीखना सभी प्राणियों का एक जन्मजात गुण है | अधिगम को एक मानसिक प्रक्रिया माना गया है | अधिगम किसी स्थिति के प्रति एक सक्रिय प्रतिक्रिया है | अनुभवों द्वारा व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों को सामान्यता अधिगम (सीखना) कहा जाता है |

  • स्किनर के अनुसार – “प्रगतिशील व्यवहार-व्यवस्थापन की प्रक्रिया अधिगम कहलाती है |
  • वुडवर्थ के अनुसार – “अधिगम नये ज्ञान व नयी प्रतिक्रियाओं को प्राप्त करने की प्रक्रिया है |”

अधिगम के सिद्धांत : Theory of Learning

अधिगम के मुख्य रूप से तीन प्रकार है –

  1. उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धांत (Stimulus Response Theory) – थार्नडाइक, पावलाव, स्किनर, हल, मिलर, गुथरी, वाट्सन, ऐस्ट्स आदि |
  2. शास्त्रीय संज्ञानात्मक सिद्धांत (Classical Cognitive Theory) – कोहलर, पियाजे, टालमैन, कोफ्का, वर्दीमर आदि |
  3. आधुनिक संज्ञानात्मक सिद्धांत (Modern Cognitive Theory) – ब्रूनर, बिंडरा, ईसाबेल, वैन्डूरा, वाल्स आदि |

उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धांत (Stimulus Response Theory) के दो प्रकार है –

  • 1- पुनर्बलन सिद्धांत (Reinforcement Theory) – थार्नडाइक, पावलाव, स्किनर, हल, मिलर आदि |
  • 2- अपुनर्बलन सिद्धांत (Reinforcement Theory) – गुथरी, वाट्सन, ऐस्ट्स आदि |

अधिगम के प्रमुख सिद्धांत : Main Theories of Learning

  • थार्नडाइक (Thorndike) – उद्दीपक-अनुक्रिया अनुबंध सिद्धांत (S-R Bond Theory)
  • कोहलर (Kohler) – सूझ का सिद्धांत (Insight Theory)
  • पावलाव (Pavlov) – अनुकूलन अनुक्रिया सिद्धांत (Conditiotioned Response Theory)
  • हल (Hull) – सबलीकरण सिद्धांत (Reinforcement Theory)
  • स्किनर (Skinner) – सक्रिय अनुबंध सिद्धांत (Operant Conditioning Theory)
  • लेविन (Levin) – क्षेत्र सिद्धांत (Field Theory)
  • टालमैन (Tolman) – चिन्ह अधिगम सिद्धांत (Sign Learning Theory)

थार्नडाइक के अधिगम के नियम : Thorndike’s Laws of Learning

अधिगम के नियमों को क्रमबद्ध करने का श्रेय एडवर्ड एल. थार्नडाइक को ही जाता है | थार्नडाइक के अधिगम के नियम उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धांत (Stimulus Response Theory) या सम्बन्धवाद सिद्धांत (connectionism Theory) पर आधारित है | थार्नडाइक ने अपनी पुस्तक Animal Intelligence में उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धांत का प्रतिपादन किया था | थार्नडाइक को संयोजनवाद का पिता माना जाता है |

अधिगम के मुख्य नियम : Primary Laws of Learning

  1. तत्परता का नियम – Law of Readiness
  2. अभ्यास का नियम – Law of Exercise
  3. प्रभाव का नियम – Law of Effect

अभ्यास के नियम के दो रूप –

  1. उपयोग का नियम (Law of Use) : किसी कार्य का बार-बार अभ्यास करने पर उसे जल्द सीख लिया जाता है |
  2. अनुपयोग का नियम (Law of Disuse) : सीखे हुए कार्य का अभ्यास/उपयोग न करने पर उसे भूल जाते है |

अधिगम के गौण नियम : Secondary Laws of Learning

  1. बहु अनुक्रिया का नियम – Law of Multiple Response
  2. मानसिक स्थिति या मनोवृत्ति का नियम – Law of Mental Set or Attitude
  3. तत्वों की पूर्व समर्थता का नियम – Law of Prepotancy of Elements
  4. सदृश्यता द्वारा अनुक्रिया का नियम – Law of Response by Analogy
  5. साहचर्य परिवर्तन का नियम – Law of Associative Shifting

अधिगम की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारक : Factors Influencing Learning

  • शारीरिक कारक : (1) ज्ञानेन्द्रियाँ (2) शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य (3) परिपक्वता (maturity)
  • मनोवैज्ञानिक कारक : (1) बुद्धि (2) रूचि व रुझान (3) अधिगम की इच्छा
  • पर्यावरण सम्बन्धी कारक : वातावरण

मापन और मूल्यांकन में अंतर : Difference Between Measurement and Evaluation

मापन का अर्थ : Meaning of Measurement

  • किसी वस्तु के गुणों का उचित इकाई में मूल्यांकन करना ही मापन कहलाता है |
  • मापन के अंतर्गत किसी वस्तु या व्यक्ति के गुणों या विशेषताओं का वर्णन किया जाता है |
  • छात्रों की शैक्षिक उपलब्धि को अंकों में व्यक्त करना मापन कहलाता है |
  • मापन का अर्थ मात्रात्मक मूल्य से है |
  • शैक्षिक अभिप्राय से किया गया मापन शैक्षिक मापन कहलाता है |
  • मापन मूल्यांकन का ही एक अंग होता है |
  • मापन मूल्यांकन में सहायक है, लेकिन मूल्यांकन का समानार्थी नही है |

मापन का उपयोग

  • वर्गीकरण (Classification) – बुद्धि के आधार पर छात्रों का वर्गीकरण करना |
  • चयन (Selection) – किसी अभिप्राय से छात्रों का चयन करना |
  • तुलना (Comparision) – छात्रों के मात्रात्मक गुणों की तुलना को प्रस्तुत करना |
  • भविष्यवाणी (Prediction) – छात्रों के सम्भावित व्यवहार के सम्बन्ध में भविष्यवाणी के रूप में इनफार्मेशन देना |
  • निदान (Diagnosis) – छात्रों/व्यक्तियों में पायी जाने वाले रोगों के लक्षणों और कारणों की इनफार्मेशन प्राप्त करना |
  • शोध (Research) – शोध कार्यों के लिए प्रदत्त प्राप्त करना |

प्रमुख मापन क्षेत्र – (1) बुद्धि परीक्षा, (2) व्यक्तित्व परीक्षा, (3) उपलब्धि परीक्षा, (4) अभिक्षमता, (5) रूचि परीक्षा

मूल्यांकन का अर्थ : Meaning of Evaluation

  • मूल्यांकन का शाब्दिक अर्थ मूल्य का अंकन करना होता है |
  • मूल्यांकन मूल्य निर्धारित की एक प्रक्रिया है |
  • मापन की अपेक्षा मूल्यांकन अधिक व्यापक होता है |
  • मूल्यांकन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमे मापन से प्राप्त परिणामों की वांछनीयता (desirability) का निर्णय किया जाता है |
  • मापन की तुलना में मूल्यांकन अधिक व्यापक होता है |

उदाहरण : छात्रों की शैक्षिक उपलब्धि को अंकों में व्यक्त करना मापन है जबकि छात्रों के प्राप्तांकों के आधार पर उनकी उपलब्धि के स्तर का निर्धारण मूल्यांकन है | जॉन को गणित में 75 अंक मिले है तो यह मापन का उदाहरण है और यदि हम कहे कि 70 छात्रों में जॉन का दूसरा स्थान है, तो यह मूल्यांकन का उदाहरण है |

मूल्यांकन प्रक्रिया के सोपान : Steps of Evaluation Process

  1. उद्देश्यों का निर्धारण – (1) सामान्य उद्देश्यों का निर्धारण करना, (2) विशिष्ट उद्देश्यों का निर्धारण और परिभाषीकरण करना |
  2. अधिगम क्रियाओं का आयोजन – (3) विशिष्ट बिन्दुओं का चयन करना, (4) उपयुक्त अधिगम क्रियाओं का आयोजन करना |
  3. मूल्यांकन – (5) छात्रों के व्यवहार परिवर्तन का पता लगाना, (6) प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर मूल्यांकन करना, (7) परिणामों को पृष्ठपोषण के रूप में प्रयुक्त करना |

मापन और मूल्यांकन की तकनीकें : Techniques of Measurement and Evaluation

  • अवलोकन तकनीक (Observation Techniques) : किसी व्यक्ति के व्यवहार को देखकर (अवलोकन करके) उसके व्यवहार का मापन करना | अवलोकन तकनीक में मापनी परीक्षण, चैक लिस्ट, ऐनकडोटल अभिलेख, अवलोकन चार्ट आदि उपकरणों का प्रयोग किया जाता है |
  • स्व-आख्या तकनीक (Self report Techniques) : मापे जा रहे व्यक्ति से ही उसके व्यवहार के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करना | स्व-आख्या तकनीक मे प्रश्नावली, साक्षात्कार, अभिवृत्ति मापनी आदि उपकरणों का प्रयोग किया जाता है |
  • परीक्षण तकनीक (Testing Techniques) : व्यक्ति के सम्मुख कुछ परिस्थितियों को रखकर उसकी प्रतिक्रिया के आधार पर उसके गुणों की मात्रा का निर्धारण करना | सम्प्राप्ति परीक्षण, मूल्य परीक्षण, बुद्धि परीक्षण, निदानात्मक परीक्षण, अभिरुचि परीक्षण आदि परीक्षण तकनीक के उदाहरण है |
  • प्रक्षेपीय तकनीक (Projective Techniques) : इस तकनीक में व्यक्ति के सामने किसी उद्दीपक परिस्थिति को प्रस्तुत करते है और उसकी प्रतिक्रिया लेते है | रोशा इंक ब्लॉट टेस्ट, टी.ए.टी., पूर्ति परीक्षण, शब्द सहचारी परीक्षण, आदि प्रक्षेपीय परीक्षण के उदाहरण है |
  • समाजमितिय तकनीक (Sociometric Techniques) : इस तकनीक में एक व्यक्ति अन्य व्यक्तियों से कैसे और अन्य व्यक्ति उससे कैसे सम्बन्ध रखते है, जैसे प्रश्नों पर उनके द्वारा दिए गये प्रश्नोत्तरों का विश्लेषण करते है | समाजमितिय तकनीक सामाजिक गतिशीलता के मापन के सर्वोत्तम तकनीक है |

अच्छे मापन उपकरण की विशेषताएं : Qualities of a Good Measuring Tool

  1. वैधता : Validity
  2. संतुलन : Balance
  3. सक्षमता : Efficiency
  4. वस्तुनिष्ठता : Objectivity
  5. विशिष्टता : Specificity
  6. कठिनता : Difficulty
  7. विभेदकता : Discrimination
  8. विश्वसनीयता : Reliability
  9. न्याययुक्त्तता : Fairness
  10. गतिशीलता : Speededness
  11. व्यावहारिकता : Practicability
  12. प्रमापीकरण : Standardization

शैक्षिक शोध के प्रकार : Types of Educational Research

  1. ऐतिहासिक शोध (Historical Research) : ऐतिहासिक शोध में बीती घटनाओं का रिकॉर्ड किया जाता है, उनका विश्लेषण किया जाता है और उनकी व्याख्या की जाती है | ऐतिहासिक शोध “क्या था” (what was) का वर्णन करता है |
  2. विवरणात्मक शोध (Descriptive Research) : विवरणात्मक शोध में वर्तमान हालातों को रिकॉर्ड किया जाता है, विश्लेषण किया जाता है और उनकी व्याख्या की जाती है | विवरणात्मक शोध में “क्या है” (what is) का वर्णन किया जाता है |
  3. प्रयोगात्मक शोध (Experimental Research) : प्रयोगात्मक शोध में कुछ चरों (variables) को नियंत्रित करते है, कुछ चरों को परिचालित (manipulate) करते है और दूसरे चर पर उसके पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करते है |

मनोवैज्ञानिक शोध की अवस्थाएँ : Stages or Phases of Psychological Research

  1. किसी शोध विषय का चयन : Selection of a Research Topic
  2. चरों का वर्गीकरण : Classification of Variables
  3. उचित शोध डिज़ाइन का चयन : Selection of an appropriate Research Design
  4. विधियाँ : Methods
  5. परिणाम विश्लेषण : Analysing the Results
  6. निष्कर्ष निकलना : Drawing Conclusion

प्राक्कल्पना का अर्थ : Meaning of Hypothesis

  • प्राक्कल्पना दो या दो से अधिक चरों (variables) के बीच एक जाँचनीय कथन (testable statement) होता है |
  • प्राक्कल्पना किसी शोध समस्या का एक प्रस्तावित जाँचनीय उत्तर (testable answer) है |
  • प्राक्कल्पना परीक्षा योग्य कथन है जो किसी समस्या का हल हो सकता है |
  • प्राक्कल्पना किसी इकाई (unit) के लिए चरों (variables) के मूल्य का निर्धारण करती है |
  • प्राक्कल्पना को परिकल्पना और उपकल्पना भी कहा जाता है |

प्राक्कल्पना के कार्य : Functions of Hypothesis

  • सिद्धातों की जाँच करना : To test theories
  • नये सिद्धातों को प्रतिपादित करना : To suggest a new theory
  • किसी घटना का वर्णन करना : To describe a phenomenon

प्राक्कल्पना के प्रकार : Types of Hypothesis

  • सकारात्मक प्राक्कल्पना (Positive Hypothesis) : सकारात्मक प्राक्कल्पना का कथन सकारात्मक वाक्य में होता है | जैसे – छात्राएं भाषण कला में छात्रों से उत्तम है |
  • नकारात्मक प्राक्कल्पना (Negative Hypothesis) : नकारात्मक प्राक्कल्पना का कथन नकारात्मक वाक्य में होता है | जैसे – छात्राएं भाषण कला में छात्रों से उत्तम नही है |
  • शून्य प्राक्कल्पना (Null Hypothesis) : शून्य प्राक्कल्पना यह बताती है कि दो चरों, जिनके सम्बन्धों का अध्ययन किया जा रहा है, में कोई अंतर नही है अथवा दोनों समान है | शून्य प्राक्कल्पना को सांख्यिकी प्राक्कल्पना भी कहते है |
  • सार्वभौमिक प्राक्कल्पना (Universal Hypothesis) : सार्वभौमिक प्राक्कल्पना वह प्केराक्कल्पना है जिसके अंतर्गत उल्लिखित सम्बन्ध, समस्त इंगित चरों के लिए, हर समय व हर स्थान पर सत्य हों | जैसे – बालक की सीखने की प्रक्रिया पुरस्कार द्वारा तेजी से होती है |
  • अस्तित्ववादी प्राक्कल्पना (Existential Hypothesis) : अस्तित्ववादी प्राक्कल्पना उस प्राक्कल्पना को कहते है जो समस्त परिस्थितियों या व्यक्तियों के लिए नही तो कम-से-कम एक परिस्थिति या व्यक्ति के लिए निश्चित रूप सही होती है | जैसे – क्लास में कम-से-कम एक छात्र तो ऐसा है, जिसमे सीखने की प्रक्रिया दण्ड देने से तेजी से होती है |

अच्छी प्राक्कल्पना की विशेषताएं : Characteristics of a Good Hypothesis

  • प्राक्कल्पना समस्या का उपयुक्त उत्तर होनी चाहिए |
  • प्राक्कल्पना किसी सिद्धांत से सम्बन्धित होनी चाहिए |
  • प्राक्कल्पना को जाँचयुक्त होना चाहिए |
  • प्राक्कल्पना को समस्या का सरलतम हल होना चाहिए |
  • प्राक्कल्पना ऐसी होनी चाहिए कि उसे अस्वीकार भी किया जा सके |
  • प्राक्कल्पना विशिष्ट होनी चाहिए |
  • प्राक्कल्पना उपलब्ध तकनीकी से सम्बन्धित होनी चाहिए |

उपलब्धि परीक्षण का अर्थ : Meaning of Achievement Test

विद्यालय में छात्र के अध्ययन सम्बन्धी प्रगति, प्राप्ति अथवा उपलब्धि को मापने के लिए उपलब्धि परीक्षण का उपयोग किया जाता है |

उपलब्धि परीक्षण का उद्देश्य : Aims of Achievement Test

  1. शिक्षकों के शिक्षण की सफलता का अनुमान का आंकलन करना |
  2. छात्रों के बौद्धिक स्तर का आंकलन करना |
  3. छात्रों का वर्गीकरण करने में मदद करना |
  4. परीक्षाओं के परिणामों को जानकर छात्रों को अध्ययन करने को प्रेरित करना |
  5. शिक्षा के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता करना |

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